१८ मी सतब्दि रजत जयंती महोत्सव सहअस्ट्रचंडी महायज्ञ २००९ ( ज़्यादा माहिती के लिए क्लिक कीजिए ) | लाइव वेबकास्ट २८/११/०९ से २/१२/०९
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श्री उमिया माताजी संस्थान का 18वीं शताब्दी रजत जयंती महोत्सव

यह संस्था 1976 में 18वीं शताब्दी महोत्सव का पच्चीस वर्ष पूरा हुआ तब से रजत जयंती महोत्सव माने पर विचार किया जा रहा था। इसके लिए सर्व मान्य समय संवत 2066 के मार्गशीर्ष शुक्ल 11 से मार्गशीर्ष 15 तारीख 28.11.2009 से 2.12.2009 के दौरान मनाने का तय किया गया। इस महोत्सव में सहस्त्र चंडी महायज्ञ से शुरु करना है। माताजी की मूर्ति में 18वीं शताब्दी महोत्सव 1976 के तैंतीस साल बाद नया जीवन डालना भी एक धार्मिक उद्देश है। साथ ही कडवा पाटीदार समाज का एक मिलन मेला भी होगा। पूरी दुनिया में रहने वाले क़डवा पाटीदार इसमे भाग लेगे। करीब 40 से 50 लाख दर्शनार्थी के आने की संभावना है।

इस महोत्सव से होने वाली आमदनी का उपयोग समाज के विकास में होने वाला है। वर्तमान में समाज उपयोगी कार्य के लिए काफी कम रकम दी जाती है। इसमें योग्य बढ़ोतरी होगा। अभी तक कन्या शिक्षा के लिए विशेष ध्यान दिया जाता रहा है जिससे लडके शिक्षा में पीछे रह जा रहे है। अब लडकियों के साथ लडकों की शिक्षा के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। पूरे गुजरात में योग्य स्थान पर शिक्षा परिसर बनाने पर विचार किया गया है। कृषि परिसर बनाने की योजना पर भी विचार किया गया है। समाज को व्यसन मुक्त करने, सांस्कृतिक संपदा को सुरक्षित रखने तथा बुजुर्ग सम्मान से जी सके, इसका प्रयास किया जाएगा। व्यवसाय के विकास के लिए भी संभवित मदद करने पर विचार है।

शहर में रहने वाले तथा गाँवो में रहने वाले लोगों का संकलन के प्रयास पर भी विचार किया जा रहा है।

इस तरह समय में परिवर्तन के साथ 21 वी ज्ञान की सदी में समाज प्रगति करता रहे तथा अपना अलग पहचान बना सके – इस खयाल के साथ रजत जयंती महोत्सव मनाया जाएगा।

मध्यप्रदेश, राजस्थान, यूपी और जहाँ भी कुर्मी क्षत्रिय रहते है उन सभी जाति भाईयों के साथ विशेष संबंध बने, ऐसा प्रयास होगा। यूपी, बिहार, उडिसा, नेपाल के सुदुर इलाके तक, राजस्थान, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और कर्णाटक तक माँ उमिया का प्रभाव बढ़ रहा है। माँ उमिया के ध्वजा के नीचे सभी जाति भाई एक बने और उनका प्रगति हो ऐसा प्रयास किया जाएगा। इन सभी विस्तार में ज्योति रथ का परिभ्रमण भी हो सकता है जिससे एकता तथा भाईचारा बढ़ेगा।

 

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